
*पूर्ण आहुति देने के पश्चात निकली भव्य रथयात्रा निकली गई*

टीकमगढ़ – श्री दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र अहार जी में छह दिवसीय के तहत आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान विश्वशांति महायज्ञ की पूजा का समापन बड़े ही श्रदा भक्ति भाव से किया गया। श्रावक श्रेष्ठी मुकेश जैन लार ने बताया की सिद्ध चक्र महामंडल विधान के समापन पर गुरूवार को पाण्डु शिला में भगवान आदिनाय को विराजमन कर रजत कलशों से अभिषेक एवं शांतिधारा कर नित्य नियम पूजा की गई। आज की वृहद सुख शांति प्रदाता शांति धारा करने का सौभाग्य प्रेमचंद्र विमल जैन हटा वाले दिल्ली परिवार, अशोक जैन अनुराग जैन आकाश जैन लार परिवार को प्राप्त हुआ। आज भगवान के 1008 सहस्त्र नाम की वृहद शांति मुनिश्री श्रुतेश सागर मुनिश्री सुश्रुत सागर महाराज द्वारा मंत्रोचार के साथ की गई। इसके बाद सम्पूर्ण विश्व में शांति सौहार्द शांति बने रहे इसलिए विश्वशांति महायज्ञ का आयोजन किया गया था जिसमे चौबीस तीर्थंकर कुंड, गौतम गणधर कुंड एवं पंच परमेष्ठी कुंड बनाए गए। हवन कुंडो में अग्नि प्रज्वलित कर ऋषि मंडल, पंच परमेष्ठी, चौबीस तीर्थंकर, विदेह क्षेत्र के बीस तीर्थंकर, चौसठ ऋद्धि मंत्रो की आहुतियां दी गई। हवन कुंड में घी, धूप, कपूर, समिधा, गोला आदि डालकर आहुतियां दी गई। हवन कुंड से निकली सुगंध से पांडाल का संपूर्ण क्षेत्र भक्ति भाव से महक उठा। इस महा आयोजन में टीकमगढ़ से आए युगल संगीतकार प्रवीण जैन श्रीमती प्रियंका जैन द्वारा शानदार भक्ति में संगीतमय से सबको मंत्र मुग्ध कर दिया। *रथयात्रा के साथ श्रीजी पहुंचे जिनालय*
पूर्णाहुति देने के उपरांत श्रीजी की भव्य रथ यात्रा निकाली गई जिसमें श्रीजी रथ पर सवार होकर घोड़ा बगगी बच्चों, महिलाओं और पुरुष श्रद्धालुओं ने रस्ते भर भक्ति नृत्य कर महावीर स्वामी के जयकारे लगाए।रथ यात्रा में श्रीजी को लेकर चल रहे श्रावकों के माथे पर स्थित रेखाएं अपने भाग्य पर इठलाती हुई प्रतीत हो रहीं थीं। रथ यात्रा क्षेत्र की परिक्रमा लगते हुये पुनः से श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी पहुंची जहाँ श्रीजी के अभिषेक-प्रक्षाल के बाद उन्हें वेदी पर विराजमान किया गया इसके साथ ही कार्यक्रम का समापन हुआ।



